राजकुमार कुम्भज की पाॅंच कविताऍं

राजकुमार कुम्भज की पाॅंच कविताऍं

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1.

कामना वसंत

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एक के बाद जिस तरह दूसरा

आता है,जाता है ॳॅंक और आदमी

ठीक उसी तरह मौसम और रॅंग

परिप्रेक्ष्य कामना वसंत

ठीक उसी तरह प्रेम और दु:ख

मैं भी और तुम भी.

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2.

वसंत की लिपि

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वसंत की लिपि अदृश्य

दृश्य में अफ़वाह और दृष्टिकोण

पल-पल बदलती है दुनिया

अपने विचारों के समीकरण

अपना क्या कुछ?

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3.

प्रश्न-वसंत

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दिव्य है,भव्य है चेतना

किन्तु उससे कहीं अधिक प्रबल

और-और शक्तिशाली है वसंत

जो पुकारता है प्रश्न बार-बार

जो हर कहीं-हर कहीं.

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4.

वसंत का आगमन

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वसंत का आगमन

आमंत्रण भी है नये जीवन का

मैं फिर-फिर लौटता हूॅं

अपने ही भीतर के जॅंगल में

खोजने ख़ुद को.

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5.

ऐसा ही है वसंत

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शुद्ध है अंत:करण

बेशर्त है,बेशर्म है पत्ता-पत्ता

खनकता है,महकता है चारों ओर

जवानी की ज़ुबान लिए महुआ

तमाम बंदिशें ठेलता हुआ

ऐसा ही है वसंत.

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