Blogगीत ग़ज़लहरियाणा

रणबीर दहिया की हरियाणवी रागनी- लोहड़ी का त्यौहार

  हरियाणवी रागनी लोहड़ी का त्यौहार रणबीर दहिया   जनवरी तेरां नै आये साल त्यौहार लोहड़ी जावै मनाया।। सुन्दरी मुन्दरी…

Blogकविता /कहानी/ नाटक/ संस्मरण / यात्रा वृतांत

ओमप्रकाश तिवारी की कविता सत्य, वहम और उपासना

कविता सत्य, वहम और उपासना ओमप्रकाश तिवारी जब उपासना शुरू होती है तभी तर्क विलुप्त हो जाता है आस्था का…

Blogकविता /कहानी/ नाटक/ संस्मरण / यात्रा वृतांत

सुमन नागर की कविता – ज़िन्दगी छोटी-सी है

कविता ज़िन्दगी छोटी-सी है  ~ सुमन नागर   निकाल लीजिए झीलों के आइनों में कभी ख़ुद को निहारने के कुछ…

Blogसाहित्यिक रिपोर्ट /संगोष्ठीहरियाणा

अंबाला के साहित्यकारों ने देश के वर्तमान हालात पर गहरी चिंता व्यक्त की

अंबाला के साहित्यकारों ने देश के वर्तमान हालात पर गहरी चिंता व्यक्त की बिलासपुर में कहानीकार मनोज रूपड़ा के साथ…

Blogआलोचना/ लेखधर्म-संस्कृतिसमय/समाज

स्वामी विवेकानंद: एक दूरदर्शी मानवतावादी

स्वामी विवेकानंद: एक दूरदर्शी मानवतावादी  डॉ.रामजीलाल स्वामी विवेकानंद (बचपन का नाम – नरेंद्र नाथ दत्त; 12 जनवरी, 1863 – 4 जुलाई, 1902) स्वामी विवेकानंद प्रसिद्ध विचारक, उच्च कोटि के देशभक्त , शिक्षक, दार्शनिक ,अंतरराष्ट्रीयवादी,मानवतावादी, आध्यात्कवाद के स्टार प्रचारक ,बेहतरीन लेखक, औजस्वी वक्ता,समाज सुधारक,धार्मिक,सन्यासी, त्यागी व करश्मावादी महामानव थे. नरेंद्र नाथ विवेकानंद बन गए:एक नया अवतार नरेंद्रनाथ विवेकानंद तब बने जब खेतड़ी…

Blogकविता /कहानी/ नाटक/ संस्मरण / यात्रा वृतांत

रणबीर दहिया की हरियाणवी रागनी- लाल बहादुर शास्त्री

लाल बहादुर शास्त्री जी को याद करते हुए रणबीर दहिया की हरियाणवी रागनी- लाल बहादुर शास्त्री   लाल बहादुर शास्त्री…

Blogकविता /कहानी/ नाटक/ संस्मरण / यात्रा वृतांत

मनजीत सिंह की कविता- सादगी के प्रतीक : लाल बहादुर शास्त्री

 कविताः पुण्य तिथि विशेष – 11 जनवरी सादगी के प्रतीक : लाल बहादुर शास्त्री मनजीत सिंह “सादा जीवन अर ऊँचे…

Blogसमय/समाजसाहित्य/पुस्तक समीक्षा

आधी आबादी के नाम, जो होगा देखा जाएगा – फ़हमीदा रियाज़

आधी आबादी के नाम, जो होगा देखा जाएगा – फ़हमीदा रियाज जसवंत मोहाली “तुम बिल्कुल हम जैसे निकले” — यह…

Blogकविता /कहानी/ नाटक/ संस्मरण / यात्रा वृतांत

राजकुमार कुम्भज कविता- शपथ है हिंदी में हिंदी की

कविता शपथ है हिंदी में हिंदी की. राजकुमार कुम्भज   शपथ है हिंदी में,हिंदी की जो कुछ कहूँगा,सच्चे अंदाज़ में…