मुनेश त्यागी की कविता सितारे बता रहे हैं… कल अंधेरा और भी घनघोर होगा

कविता

सितारे बता रहे हैं… कल अंधेरा और भी घनघोर होगा

मुनेश त्यागी

पटवारी की कलम की मार वही है,
दरोगा, सिपाही की अकड वही है,
लाला की मिठी मिठी मार वही है,
पेशकार की मार की रफ्तार वही है,
मजदूरों की मेहनत की हडप वही है,
लूटमार की रफ्तार भी वही है।

मंहगाई की स्पीड कहां बदली है?
मीडिया का झूठ तो वैसे ही दौड़ रहा है,
सियासत की चालें वहीं हैं,
रोग बहुत हैं, निदान नही हैं,
किसानों पर कुदरत और सरकार
की मार वही है।

शोषण का शिकंजा इनटैक्ट है,
जुमलेबाजी की ऱफ्तार और तेज हो गई है,
लोगों को रोजगार की जगह,
राममंदिर और मस्जिद के नीचे मंदिर का झुनझुना पकडा दिया गया है।
कार्यस्थलों पर बच्चों की मुस्कान,
रोजाना जिबह हो रही है।

गरीब बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों के
सडकों पर भीख मांगने के दुखदायक
नजारे वहीं हैं,
जोकों की खून पीने की गति,
पहले से ज्यादा ही तेज हो गई है।

वायदे तो स्वर्ग में ले जाने के किये गये थे,
मगर धकेला जा रहा है नर्क में,
जन्नत को जमीन पर लाने का
ऐलान किया गया था,
मगर नर्क में और नर्क फैल रहे हैं।

चुनावी नारों पर अमल की जगह,
जुमले और झुनझुने थमाये जा रहे हैं,
बेईमानी की बहार में कोई कमी नही आयी है,
ईमानदारी को ठैंगा दिखाया जा रहा है और वह खुदकुशी करने पर उतारू है।

अंधविश्वास और पाखंडों पर
बहारों की भरमार है,
ज्ञान और तर्क की जगह,
अज्ञान और कुतर्क
विराजमान होकर मौज में हैं।

पहले वाला राजा सियाह था,
और अब का तो और भी ज्यादा सियाह,
मुफलिसी, भूख, भ्रष्टाचार और मंहगाई तो बिल्कुल वैसी की वैसी ही हैं।

बचपन स्कूलों की जगह,
दुकानों पर बरतन धो रहा है
और सडकों पर भीख मांग रहा है,
सियासत पहले भी दौलतमन्दों
की सेवा कर रही थी और
आज तो और भी ज्यादा।

किसानों की फसलों के लुटेरे
पहले भी वही थे और आज भी वही,
सियासतदां पहले भी धन्नासेठों की
गोदी में बैठे थे और आज तो बिल्कुल खुलकर ।

कल, परसों जैसा अंधकारमय था
और आज, कल से भी ज्यादा।
सच में कुछ भी नही बदला है,
सारा ताना बाना तो वही है।

भला आंधियों में भी,
कहीं चिराग जलते होंगे।
सवार ही तो बदले हैं,
रकाब और जीन तो वही हैं।

जिल्द ही तो बदली है,
सफे तो वहीं हैं,
वतनफरोश राजा बन बैठे हैं
सवाल तो कुछ हैं ,
मगर जवाब कुछ और।

बहाने बदले हैं,
मुद्दे तो वही हैं,
कुछ लीपापोती के साथ,
बहुत कुछ बिना लीपापोती के।

बिल्कुल सच है यह कि
एकजुट होकर ज्ञानी विज्ञानी नहीं बनें और मुक्ति के मार्ग पर आगे नहीं बढ़े तो हालात और भी खराब होने जा रहे हैं।
इस सबको देखकर सितारे बता रहे हैं कि कल को अंधेरा और भी घनघोर होगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *