हरकिशन सिंह सुरजीत को उनकी 17वीं पुण्यतिथि पर भावभीनी श्रद्धांजलि, धर्मनिरपेक्ष राजनीति में उनके योगदान से प्रेरणा लेने का संकल्प
कॉमरेड सुरजीत हमेशा देश की एकता और अखंडता बनाए रखने की बात करते थे: कॉमरेड मोहम्मद यूसुफ तारिगामी
कॉमरेड सुरजीत के पदचिन्हों पर चलना ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि है: कॉमरेड सेखों
चंडीगढ़। अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त माकपा महासचिव और बाबा सोहन सिंह भकना भवन ट्रस्ट के संस्थापक कामरेड हरकिशन सिंह सुरजीत की 17वीं पुण्यतिथि सेक्टर 29-डी स्थित बाबा सोहन सिंह भकना भवन में मनाई गई। समारोह की अध्यक्षता बाबा सोहन सिंह भकना ट्रस्ट के सदस्य कामरेड मेजर सिंह भिखीविंड और कामरेड गुरदर्शन सिंह खासपुर ने की और कामरेड भूप चंद चन्नो मंच सचिव थे।
अध्यक्ष मंडल में सीपीआई (एम) केंद्रीय समिति सदस्य और जम्मू-कश्मीर विधान सभा सदस्य कॉमरेड मोहम्मद यूसुफ तारिगामी, राज्य सचिव कॉमरेड सुखविंदर सिंह सेखों, राज्य सचिवमंडल सदस्य कॉमरेड भूप चंद चन्नो, कॉमरेड गुरनेक सिंह भज्जल, कॉमरेड स्वर्ण सिंह डालियो, सुखप्रीत सिंह जोहल, अब्दुल सत्तार, जतिंदरपाल सिंह, सतनाम सिंह बराइच, बलजीत सिंह ग्रेवाल, सीपीआई राज्य सचिव बंत सिंह बराड़, कांग्रेस नेता और विधायक परगट शामिल थे। इसके अलावा पूर्व केंद्रीय मंत्री बलवंत सिंह रामूवालिया, देश भगत यादगार हॉल कमेटी जालंधर के महासचिव पिरथीपाल सिंह मारीमेघा और ‘देश सेवक’ के स्थानीय संपादक-सह-महाप्रबंधक चेतन शर्मा और संपादक रिपुदमन सिंह रिप्पी शामिल थे।
कॉमरेड सुरजीत को श्रद्धांजलि देते हुए मुहम्मद यूसुफ तारिगामी ने कहा कि कॉमरेड सुरजीत उनके गुरु थे। उन्हें कॉमरेड सुरजीत से सीखने के कई अवसर मिले। सुरजीत एक ऐसी शख्सियत थे जिनके पास हर मसले का हल था। सुरजीत को हमेशा इस बात का दुख रहा कि देश दो हिस्सों में बंट गया, उनका मतलब भारत और पाकिस्तान से था। सुरजीत हमेशा देश की एकता और अखंडता को बनाए रखने की बात करते थे। आज हमारा देश जिस दिशा में जा रहा है, उसमें हम हर दिन मर रहे हैं। हमारे खाने-पीने, पहनावे और बोलने की आज़ादी पर पाबंदियां लगाई जा रही हैं।
इस मौके पर उन्होंने देश के साथ जम्मू-कश्मीर का दर्द साझा किया और कहा कि जब देश दो हिस्सों में बंटा था, तब जम्मू-कश्मीर के लोगों ने यहीं रहना पसंद किया क्योंकि वे इसी मिट्टी में पैदा हुए और प्यार करते थे और आज भी करते हैं। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोग लंबे समय से जिस त्रासदी से गुजर रहे हैं, वह किसी से छिपी नहीं है। जम्मू-कश्मीर के लोगों को उनके अधिकार बहाल करने की बजाय, उन्हें अनुच्छेद 370 और 35-ए को खत्म करके एक तोहफा दिया गया।
कामरेड सेखों ने कहा कि सुरजीत का पूरा जीवन संघर्ष से भरा रहा और वे सिद्धांतों से कभी पीछे नहीं हटे। उन्होंने साम्राज्यवाद के शोषण के खिलाफ जमकर लड़ाई लड़ी और लोगों को इसके खिलाफ लामबंद किया। सेखों ने कहा कि पिछले लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा-आरएसएस को अलग करने के लिए ‘भारत’ गुट के गठन में दिवंगत कामरेड सीताराम येचुरी का अहम योगदान था। नतीजतन, 400 पार का नारा देकर दावा करने वाली भाजपा 240 सीटों पर सिमट गई।
भाकपा के राज्य सचिव बंत सिंह बराड़ ने कहा कि कामरेड सुरजीत ने सांप्रदायिक ताकतों को अपना फायदा नहीं उठाने दिया। वे विश्व के एक महान कम्युनिस्ट नेता थे। आज देश उन लोगों के हाथों में आ गया है जो गद्दार और अंग्रेजों के दलाल थे। उन्होंने कहा कि इन्हें उखाड़ फेंकने के लिए एक बड़ी ताकत की जरूरत है, जो लामबंदी से ही संभव है।
जालंधर के महासचिव पिरथीपाल सिंह मरीमेघा ने कामरेड सुरजीत को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि हमें कामरेड सुरजीत के विचारों और सोच को संजोकर रखना चाहिए और नई पीढ़ी को उनके व्यक्तित्व से अवगत कराना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर कामरेड सुरजीत आज होते तो किसी भी हालत में भाजपा की सरकार नहीं बन पाती। उनके पास राजनीतिक चालों का बड़ा खजाना था। उन्होंने कामरेड सुरजीत के साथ अपनी यादें ताजा कीं।
कांग्रेस नेता और विधायक परगट सिंह ने कामरेड सुरजीत को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि कामरेड सुरजीत ने जीवन भर उसूलों और सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। वह एक बहुत ही दृढ़ निश्चयी अंतरराष्ट्रीय स्तर के कम्युनिस्ट नेता थे। परगट सिंह और अन्य ने कहा कि कामरेड सुरजीत समाज, पंजाब और देश की बात करते थे। उन्होंने कहा कि देश के मौजूदा माहौल में कामरेड सुरजीत के पदचिन्हों पर चलना बहुत जरूरी है, तभी सांप्रदायिक ताकतों को हराया जा सकता है। उन्होंने कामरेड सुरजीत और अन्य के साथ बिताए पलों को भी याद किया।
कामरेड सुरजीत के लंबे समय तक साथी रहे पूर्व केंद्रीय मंत्री बलवंत सिंह रामूवालिया ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर के महान कम्युनिस्ट नेता कामरेड सुरजीत अपने आप में एक संस्था थे। सुरजीत इतने कुशाग्र बुद्धि के थे कि बड़े से बड़ा राजनेता भी उनके बताए रास्ते पर चलते थे और समय-समय पर उनसे सलाह लेते थे। देश की राजनीति कामरेड सुरजीत के इर्द-गिर्द घूमती थी। उन्होंने कहा कि कम्युनिस्टों की इस बात के लिए प्रशंसा की जानी चाहिए कि उन्होंने लाल झंडे को थामे रखा और उसका रंग फीका नहीं पड़ने दिया। उन्होंने कहा कि कम्युनिस्टों का आंदोलन कभी खत्म नहीं होता, ठंडा पड़ जाता है। उन्होंने कहा कि कामरेड सुरजीत को सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि उनके द्वारा स्थापित सिद्धांतों को अपनाकर जनहितैषी राजनीति में हिस्सा लिया जाए।
इस अवसर पर लोक भलाई पार्टी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष साथी जनक राज कलवानू भी उपस्थित थे। श्रद्धांजलि समारोह के अंत में कामरेड गुरदर्शन सिंह खासपुर ने सभी का धन्यवाद किया और कहा कि सांप्रदायिक ताकतों को हराने के लिए दिन-रात एक करना कामरेड सुरजीत को एक क्रांतिकारी श्रद्धांजलि होगी।
