कविता
इंतजार
ओमप्रकाश तिवारी
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फेसबुक पर खोजता रहा
हर पोस्ट की लाइक लिस्ट से लेकर
फ्रेंड लिस्ट तक
कमेंट बाक्स से लेकर
हर अपडेट तक
ई-मेल के इन बाक्स से लेकर
हर सोशल साइट पर
वह नहीं मिला
ना ही मिला उसका संदेश
एक दिन चुपके से
वह घर पर ही आ गया
लिफाफा खोलते ही
परिवेश में फैल गई खुशबू
ऐसी सुगंध जिसे सालों पहले
छोड़ गया था वह
हमारी आखिरी मुलाकात के दौरान
कागज पर शब्द
फूल की तरह खिले थे
पढ़ते समय लग रहा था
विचरण कर रहे हैं उपवन में
पढ़ने के बाद भी
पंक्तियों पर फिसलती रही आंखें
ओस से भीगी नरम दूब पर
सुबह सुबह नंगे पांव
चलने का होता रहा अहसास
अचानक
अंतिम पंक्ति के नीचे
ठहर गईं निगाहें
कुछ लिखकर काट दिया गया था
सजल हो गए नयन
गला भी भर आया
आंसुओं में तैर रहे थे
लिखकर काटे गए शब्द
वैसे ही मुस्करा रहे थे
जैसे आखिरी मुलाकात के दौरान
मुस्करा रहा था वह….
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