जीवन संघर्षों से उपजी हैं अनिल ख्याल अत्री की कविताएं

पुस्तक समीक्षा

जीवन संघर्षों से उपजी हैं अनिल ख्याल अत्री की कविताएं

जयपाल

‘नश्तूर’ अनिल ख्याल अत्री का दो भाषाओं- हिंदी और पंजाबी में 2025 में प्रकाशित कविता संग्रह है। ये अपने आप में एक अलग प्रयोग है। पहले भाग में पंजाबी की 45 कवितायें है और दूसरे भाग में हिंदी की 28 कविताएँ है । कविता संग्रह को हिंदी के विद्वान लेखक डॉ. स्वर्गीय डॉक्टर रवींद्र गासो को समर्पित किया गया है। इससे कवि की वैचारिक प्राथमिकता का पता चलता है।

अनिल ख्याल अत्री एक सूफियाना अंदाज़ के कवि हैं । वे जीवन के रंग में गहरे डूबते हैं और वहां जो हीरे मोती मिलते हैं उन्हें अपने पाठकों में बांट देते हैं। उनकी कविता मनुष्य जीवन-संदर्भों को मार्मिकता के साथ स्पर्श करती है । इन कविताओं में जीवन के दर्द अधिक है और सुख के पल बहुत कम । आज के मनुष्य का जीवन भी तो कुछ ऐसी ही सामाजिक स्थितियों से घिरा हुआ है।

जीवन की आपा-धापी और भाग दौड़ में ही सारी उम्र निकल जाती है। कुछ भी हाथ नहीं लगता। क्या खोया क्या पाया..कुछ पता नहीं..कभी ढंग से बैठ कर कभी सोचा ही नहीं। कवि ,जीवन की इस अस्थिरता पर चिंतन करता है । शायद कवि ने जीवन में संघर्षों से अधिक सामना किया है और प्राप्ति बहुत कम । कवि अपनी जीवन-यात्रा को याद करते हुए अपने सहयोगियों को भी याद करते हैं । कुछ ने उनका साथ दिया और कुछ मूकदर्शक बने रहे।

हिन्दी और पंजाबी में रचित इन कविताओं का स्वर और तेवर एक जैसे हैं। इनकी रचना प्रक्रिया भी लगभग एक जैसी है। जीवन की छोटी-छोटी घटनाओं को लेकर लिखी गई इन कविताओं के अर्थ व्यापक और गंभीर हैं । पंजाबी की कविता ‘मासूम- सवाल’ और हिंदी की कविता ‘नया साल’ में एक प्रश्न के माध्यम से उत्तर खोजने का प्रयास है। इसी प्रकार–कलम की कसम में लेखक को कलम के साथ ईमानदारी बरतने का सुझाव है और सत्ता की चाटुकारिता से आगाह किया गया है। वचन- प्रवचन और अभिषेक कविता में नेता और देवता की तुलना करते हुए पत्थर के देवता से नेता के पत्थर-पन को अधिक खतरनाक बताया है ।

“डुब्बदा तारा” पंजाबी कविता में रोशनी बांटते तारे को श्रेष्ठ बताने के पीछे समाज की भलाई में लगे व्यक्तियों को प्रेरित करना है l “की भरोसा” पंजाबी कविता में जीवन में होने वाली घटनाओं के बारे मे बात करते हुए कवि जीवन को अनिश्चित मानता है।

कुछ हिन्दी- पंजाबी कविताओं के अंश तो जीवन के गहरे सूत्र वाक्यों की तरह याद रखने योग्य हैं जैसे—

*नजाकत और हलीमी में ही

होती है जीतने की जिद्द

*दर्द है तो जीवन है

*निष्प्राण है तुम्हारी कविता

रौशनी के नाम पर सिर्फ

रौशनी की एक तस्वीर

*एक ऐसी आवाज जो

दबाए न दबे

और एक ऐसी छाप

जो मिटाये न मिटे

*जैसे रोज़-रोज़ एक ही

दर्जे का तापमान लिए

उदय हो रहा हो सूरज

 

*जणा खणा जदौं देंदाए सानूं

धरती ते भार दा खिताब

 

*पर देण वालेआं ने तूहानू फुॅल

अते सानू क॔डेआं दा नां दित्ता है

प्रूफ की त्रुटियां खलती हैं। कहीं कहीं कविता की पंक्तियों के असंगत संयोजन के कारण वाक्य प्रवाह तो टूटता ही है , गद्यात्मकता भी आ जाती है। कुछ कविताओं में उपदेशात्मकता भी है । द्विभाषी होने के कारण यह हिंदी और पंजाबी दोनों भाषाओं के पाठकों के लिये रुचिकर और पठनीय है। जीवन को गंभीरता, निश्छलता, धैर्य के साथ जीने का सलीका देता है। कवि अनिल ख्याल अत्री को बहुत बहुत बधाई !!

पुस्तक का नाम–नश्तूर (कविता-संग्रह/ हिन्दी-पंजाबी)

कवि-अनिल खयाल अत्री

प्रकाशक जौहरा प्रकाशन पटियाला

 

समीक्षक-जयपाल

 

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