ऑक्सफैम की रिपोर्ट ने अमीरी और गरीबी की हकीकत
3000 के पार हुई अरबपतियों की संख्या
दुनिया में अरबपतियों की दौलत आज तक के सबसे ऊँचे स्तर पर पहुँच गई है. इतिहास में पहली बार, दुनिया भर में अरबपतियों की संख्या 3,000 के पार हो गई है. ‘द वायर’ की रिपोर्ट के मुताबिक, यह खुलासा ऑक्सफैम की नई रिपोर्ट ‘रेसिस्टिंग द रूल ऑफ द रिच’ में हुआ है, जिसे दावोस में जारी किया गया.
रिपोर्ट बताती है कि जहाँ दुनिया का हर चौथा व्यक्ति भूख और खाद्य असुरक्षा का सामना कर रहा है, वहीं सबसे अमीर 1% लोगों के पास सबसे गरीब 50% लोगों की तुलना में औसतन 8,251 गुना अधिक संपत्ति है. मानवता का सबसे गरीब आधा हिस्सा दुनिया की कुल संपत्ति का सिर्फ 0.52% रखता है, जबकि शीर्ष 1% के पास लगभग आधा, यानी 43.8% हिस्सा है. ऑक्सफैम का कहना है कि यह कोई संयोग नहीं है, बल्कि एक सोची-समझी व्यवस्था है, जहाँ सरकारें अधिकारों और आज़ादी के बजाय दौलत की रक्षा को चुन रही हैं.
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि न केवल अरबपतियों की दौलत बढ़ी है, बल्कि उनकी राजनीतिक ताक़त भी बढ़ी है. नवंबर 2024 में डोनाल्ड ट्रंप के चुनाव के बाद से अरबपतियों की संपत्ति पिछले पांच वर्षों की औसत दर से तीन गुना तेज़ी से बढ़ी है. दूसरी ओर, गरीबी कम करने की रफ़्तार रुक गई है. 2022 में दुनिया की लगभग आधी आबादी (48%) गरीबी में जी रही थी.
ऑक्सफैम नोट करता है कि दुनिया भर में तानाशाही का उदय सीधे तौर पर आय की असमानता से जुड़ा है. 136 देशों के डेटा से पुष्टि होती है कि जैसे-जैसे आर्थिक संसाधन असमान रूप से बंटते हैं, वैसे-वैसे राजनीतिक शक्ति भी कुछ हाथों में सिमट जाती है. अमीर लोग राजनीति को खरीदकर, लॉबिंग करके और सीधे संस्थानों तक पहुँच बनाकर अपनी ताक़त बढ़ाते हैं. जब लोग इस व्यवस्था के खिलाफ बोलते हैं, तो सरकारें दमन का रास्ता अपनाती हैं.
भारत के संदर्भ में भी यह मुद्दा गंभीर है. ‘वर्ल्ड इनइक्वालिटी’ (विश्व विषमता) रिपोर्ट ने भारत को दुनिया के सबसे असमान देशों में से एक बताया है, जिसका ऑक्सफैम ने भी समर्थन किया है. रिपोर्ट सुझाव देती है कि इस खाई को पाटने का एक सीधा तरीका ‘कराधान’ है. अगर 100,000 से कम अति-धनवान लोगों पर सिर्फ 3% का ग्लोबल टैक्स लगाया जाए, तो सालाना 750 बिलियन डॉलर जुटाए जा सकते हैं. दिलचस्प बात यह है कि दुनिया भर के करीब 400 करोड़पतियों और अरबपतियों ने खुद पत्र लिखकर मांग की है कि उन पर टैक्स बढ़ाया जाए ताकि समाज को बचाया जा सके.
