किस्सा सुभाष चन्द्र बोस वार्ता- 2

हरियाणवी रागनीः

 

किस्सा सुभाष चन्द्र बोस वार्ता- 2

 

डॉ रणबीर सिंह दहिया

एक बार आजाद हिन्द फ़ौज में धर्मों को लेकर फौजियों में चर्चा होने लगी | बात सुभाष चन्दर बोस तक पहुंचती है तो सुभाष बोस फौजियों से बात करते हुए कहते हैं:-
भारत जैसे देशों में और विशेषकर उन भारतीय परिवारों में जहां कि रूढ़िवादी, संकीर्ण, साम्प्रदायिक या जातीय भेदभाव को बढ़ावा देने वाली सोच को महत्व दिया जाता है, वहां अक्सर देखा जाता है कि लोग उम्र या शरीर से भले ही बड़े हो जायें , यहां तक कि बड़ी बड़ी डिग्रीयां भी हासिल कर लें, किंतु तब भी दृष्टिकोण के मामले में , सोच के मामले में वे छोटे ही बने रहते हैं , उनकी बुद्धि विकसित नहीं हो पाती और इसलिए समय समय पर सामाजिक या पारिवारिक परंपराओं के विरुद्ध विद्रोह सामने आते हैं। और इसी मौके पर नेताजी सुभाष बोस फौजियों से एक बात द्वारा धर्म के बारे में क्या पूछते हैं भला —

धरम के सै माणस का मनै कोण बताइयो नै।
माणस मारो लिख्या कड़ै मनै कोण दिखाद्यो नै।।
1
माणस तै मत प्यार करो कौणसा धरम सिखावै
सरेआम अत्याचार करो कौणसा धरम सिखावै
तम दारू का ब्यौपार करो कौणसा धरम सिखावै
रोजाना नर संहार करो कौणसा धरम सिखावै
धरम क्यों खून के प्यासे मनै कोण समझाद्यो नै।।
2
ईसरा राम और अल्लाह जिब एक बताये सारे रै
इनके चाहवण आले बन्दे क्यूं खार कसूती खारे रै
क्यों एक दूजे नै मारण नै एके जी हाथां ठारे रै
अमीर देस हथियार बेच कै खूबै मौज उड़ारे रै
बैर करो मारो काटो लिखै वो ग्रंथ भुलाद्यो नै।।
धरम क्यों खून के प्यासे मनै कोण समझाद्यो नै।।
3
मानवता का तत कहैं सब धरमां की जड़ मैं सै
प्रेम कुदरत का सारा सब धरमां की लड़ मैं सै
कदे कदीमी प्रेम का रिस्ता माणस की धड़ मैं सै
कट्टरवाद नै घेर लिया यो धरम जकड़ मैं सै
लोगां तै अरदास मेरी क्यूकरै इनै छटवाद्यो नै।।
धरम क्यों खून के प्यासे मनै कोण समझाद्यो नै।।
4
यो जहर तत्ववाद का सब धरमां मैं फैला दिया
कट्टरवाद घोल प्याली मैं सब तांहि पिला दिया
स्कीम बणा दंगे करे इन्सान खड़या जला दिया
बड़ मानवता का आज सब धर्मां नै हिला दिया
रणबीर रोवै खड़या इसनै चुप करवाद्यो नै।।
धरम क्यों खून के प्यासे मनै कोण समझाद्यो नै।।

लेखक- डॉ रणबीर सिंह दहिया

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